Naimisharanya Dham: वेद-पुराण, रामायण और महाभारत से जुड़ा पवित्र तीर्थ है नैमिषारण्य
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    Naimisharanya Dham: वेद-पुराण, रामायण और महाभारत से जुड़ा पवित्र तीर्थ है नैमिषारण्य

    धार्मिक घटनाओं के साथ वैदिक साहित्य की रचनाओं से भी जुड़ा हुआ भारत का एक ऐसा पौराणिक-ऐतिहासिक धार्मिक स्थल जो बिल्कुल अज्ञात तो नहीं लेकिन नई पीढ़ी की सहज जानकारी में भी नहीं है- वह है नैमिषारण्य धाम
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    Naimisharanya Dham: वेद-पुराण, रामायण और महाभारत से जुड़ा पवित्र तीर्थ है नैमिषारण्य

    नीमेसर के नाम से भी जाना जाता यह स्थान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 90 किलोमीटर की दूरी पर सीतापुर जिले में स्थित है।
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    Naimisharanya Dham: वेद-पुराण, रामायण और महाभारत से जुड़ा पवित्र तीर्थ है नैमिषारण्य

    यहीं चारों वेदों, 18 पुराणों, असंख्य शास्त्रों और अन्य कई धार्मिक ग्रंथों की रचनाएं हुई हैं। जहां पुरातन काल में सूत जी महाराज शौनिक आदि अपने अट्ठासी हजार ऋषियों को निरंतर प्रवचन के दौरान पौराणिक इतिहास की कहानी सुनाया करते थे।
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    Naimisharanya Dham: वेद-पुराण, रामायण और महाभारत से जुड़ा पवित्र तीर्थ है नैमिषारण्य

    धार्मिक ग्रंथों की रचनाएं करते थे। यहीं पर भगवान राम ने अपना अश्वमेघ यज्ञ पूर्ण किया था।
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    Naimisharanya Dham: वेद-पुराण, रामायण और महाभारत से जुड़ा पवित्र तीर्थ है नैमिषारण्य

    रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि से उनकी मुलाकात का स्थान भी नैमिषारण्य को ही बताया गया है तथा अपने पुत्रों लव और कुश से भगवान राम की मुलाकात भी इसी स्थान पर हुई थी।