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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    मकर संक्रांति से प्रयागराज में कुंभ शुरू हो रहा है। बता दें प्रत्येक 3 वर्ष बाद 4 तीर्थों पर कुंभ का आयोजन किया जाता है। इस दौरान हर तीर्थ की बारी 12 साल के बाद आती है।
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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    इस साल का कुंभ मेला संगमनगरी प्रयागराज में शुरू होने जा रहा है। लेकिन बहुत कम लोग हैं जो इससे जुड़ी बातें जानते हैं तो चलिए आपको इसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं
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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    कुंभ मेले का महत्व कुंभ महोत्सव इस साल 2019 में संगमनगरी प्रयागराज में आयोजित किया गया है। ये महोत्सव पौष मास की पूर्णिमा से शुरू होता है जो अपने आप में एक खास महत्व रखता है।
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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    आपको बता दें कि कुंभ महोत्सव हर चौथे साल नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन, और हरिद्वार में बारी-बारी से मनाया जाता है।
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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    प्रयाग कुंभ की खासियत प्रयाग कुंभ मेला बाकि कुंभ मेलाओं की तुलना में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके पीछे कुछ आध्यात्मिक कारण हैं। माना जाता है कि यह कुंभ प्रकाश की ओर ले जाता है।
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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    ये एक ऐसा स्थान है जहां बुद्धिमत्ता का प्रतीक यानि सूर्य का उदय होता है। मान्ता है कि यहां जिस स्थान पर कुंभ मेले का आयोजन होता है उसे ब्रह्माण्ड का उद्गम और पृथ्वी का केंद्र माना जाता है।
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    प्रयागराज के कुंभ की क्या है खासियत ?

    पौराणिक क्थाओं के अनुसार मान्यता है कि ब्रह्माण्ड की रचना से पहले ब्रम्हाजी ने यहीं अश्वमेघ यज्ञ किया था। मान्यता ये भी है कि इस यज्ञ के प्रतीक स्वरुप के तौर पर दश्वमेघ घाट और ब्रम्हेश्वर मंदिर अभी भी यहां मौजूद हैं। ये भी एक कारण है जिसके चलते प्रयाग का कुंभ इतना प्रसिद्ध है।