बारिश के आने का प्रतीक है ये त्योहार
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    बारिश के आने का प्रतीक है ये त्योहार

    नवग्रहों के राजा सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन को सूर्य की संक्रांति कहा जाता है। उड़ीसा में इस त्योहार को राजा परबा कहा जाता है और 4 दिन तक बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
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    कल 15 जून, शनिवार के दिन सूर्यदेव वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। अत: इस दिन को मिथुन संक्रांति कहा जाता है।
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    हिंदू पंचांग के अनुसार इसे पर्व के रुप में मनाए जाने का विधान है। वर्षा ऋतु का आरंभ भी मिथुन संक्रांति के बाद शुरु होता है।
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    इस फेस्टिवल के माध्यम से पहली बारिश का वेलकम किया जाता है। कहते हैं इस रोज़ चावल नहीं खाने चाहिए।
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    इस दिन कृषि संबंधित कोई भी काम नहीं किया जाता क्योंकि भू देवी को पूरी तरह से आराम दिया जाता है।
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    मिथुन संक्रांति पर सिलबट्टे की भूदेवी के रूप में पूजा किए जाने का विधान है। उसे कच्ची लस्सी से स्नान करवाया जाता है, फिर हल्दी, फूलों, सिंदूर और चंदन से सजाया जाता है।
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    भूदेवी श्री हरि विष्णु की पत्नी हैं। उड़िसा के जगन्नाथ मंदिर में आज भी भूदेवी की चांदी की प्रतिमा स्थापित है एवं ये पर्व वहां बहुत धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
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    संक्रांति का दिन दान-पुण्य करने के लिहाज से बेहद मंगलमय है। अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करें। पितरों के लिए तर्पण का विशेष महत्व है।
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    गरीबों को वस्त्रों का दान करें।