श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    श्रीखंड महादेव हिमाचल के ग्रेट हिमाचल नेशनल पार्क से सटा हुआ है। लोक मान्यता के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग में साक्षात भगवान शिव का निवास है।
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    यहां मौज़ूद शिवलिग की लगभग 72 फीट ऊंचा है और जिस पहाड़ी पर महादेव विराजमान हैं उसकी ऊंचाई लगभग 18 हज़ार 570 फीट ऊंची हैं। जिसके लिए यात्रियों को 32 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई चढ़कर पहुंचना पड़ता है।
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    बताया जा रहा है इस बार की श्री खंड महादेव की यात्रा खतरों से भरी हुई हैं। जिस कारण इस बाबा के भक्तों को उनके बाबा के दर्शन करने के लिए बहुत मुश्किलों सामना करना पड़ सकता है।
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    इस कारण है श्री खंड महादेव के यात्रा मार्ग में जमी बर्फ। बताया जा रहा है पार्वती बाग से आगे का सारे रास्ते में केवल बर्फ़ ही बर्फ़ है।
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    कहा जा रहा है इस बार यात्रियों को श्री खंड तक जाने के लिए बर्फ़ के बड़े-बड़े ग्लेशियरों को पार करना होगा। हालांकि श्री खंड की इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ़ से सभी प्रकार से पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
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    यात्रा के दौरान डंडाधार, थाचडू, काली टॉप, कालीघाटी, भीम तलाई, कुंशा, भीम डवारी, पर्वतीबाग, नैन सरोवर आदि दर्शनीय स्थल रास्ते में आते हैं।
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के अनुसार सिंहगाड बेसकैंप और कुंशा में मेडिकल सहायता कैंप के अलावा भीडवारी, पार्वती बाग और थाचड़ू में कैंप बनाए गए हैं। पौराणिक किंवदंतियों के अनुसार यहीं पर भगवान विष्णु ने शिव जी से वरदान प्राप्त भस्मासुर को नृत्य के लिए राजी किया था।
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    श्री खंड महादेव : कठिन है इस बार की यात्रा, दर्शन के लिए करना होगी कड़ी मशक्कत

    नृत्य के दौरान करते उसने अपना हाथ अपने ही सिर पर रख लिया जिसके कारण वह खुद ही भस्म हो गया था। मान्यता है कि इस ही कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी दूर से ही लाल दिखाई देते हैं।