Janmashtami: इस वन में आज भी श्रीकृष्ण रचाते हैं रासलीला, देखने वाले हो जाते हैं पागल
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    Janmashtami: इस वन में आज भी श्रीकृष्ण रचाते हैं रासलीला, देखने वाले हो जाते हैं पागल

    भारत में ऐसे बहुत से स्थान हैं जहां रहस्यमयी और चमत्कारों की कहानियां सुनने को मिलती हैं। वृंदावन भी ऐसी जगह है, जहां भगवान कृष्ण का बचपन गुजरा था।
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    वहीं एक निधि वन है जहां माना जाता है कि प्रत्येक रात को श्रीकृष्ण देवी राधा और गोपियों संग रासलीला करते हैं।
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    शाम होते ही निधिवन से लोगों को बाहर निकाल दिया जाता है क्योंकि माना जाता है कि यहां प्रत्येक रात को श्री कृष्ण आकर गोपियों संग रासलीला करते हैं।
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    यदि कोई व्यक्ति इन्हें देखता है तो वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है या उसकी मृत्यु हो जाती है। कहते हैं कि एक भक्त निधिवन की झाड़ियों में छुपा था।
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    सुबह देखने पर वह बेहोश था और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ चुका था। निधिवन में तुलसी के पेड़ हैं। यहां तुलसी का प्रत्येक पौधा जोड़े में है।
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    मान्यता है कि जब श्री कृष्ण और राधा रासलीला करते हैं तो ये तुलसी पौधे गोपियां बन जाती हैं और प्रात: होने पर तुलसी पौधे में परिवर्तित हो जाते हैं।
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    निधिवन के भीतर रंग महल नाम का एक छोटा मंदिर स्थित है। इससे संबंधित मान्यता है कि प्रत्येक रात को श्रीकृष्ण और देवी राधा यहां विश्राम करने आते हैं इसलिए...
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    शाम से पूर्व ही रंग महल में चंदन का पलंग, पानी का लोटा, देवी राधा के लिए श्रृंगार का सामान, प्रसाद, पान आदि रख दिया जाता है। संपूर्ण मंदिर की सजावट की जाती है और रात को निधिवन और मंदिर के कपाट बंद कर देते हैं।
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    प्रात: 5 बजे मंदिर के कपाट खोलने पर संपूर्ण सामान फैला हुआ होता है, पान खाया हुआ और जल का पात्र खाली होता है।
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    रंगमहल में भक्त केवल श्रृंगार का सामान ही चढ़ाते है। प्रसाद स्वरुप उन्हें भी श्रृंगार का सामान मिलता है।
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    यहां लगे वृक्षों की शाखाएं ऊपर की और नहीं अपितु नीचे की ओर बढ़ती हैं। ये पेड़ ऐसे फैले हैं कि रास्ता बनाने के लिए इन पेड़ों को डंडे के सहारे रोका गया है।
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    वन के समीप बने घरों में उस तरफ खिड़कियां नहीं बनाते। स्थानीय लोगों का मानना है कि शाम के बाद कोई इस वन की ओर नहीं देखता। जिन लोगों ने देखने का प्रयास किया वे अंधे हो गए या फिर पागल हो गए।
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    निधिवन में विशाखा कुंड भी है। कहते हैं कि जब श्रीकृष्ण सखियों संग रासलीला कर रहे थे तब उनकी एक सखी को प्यास लगी जिसका नाम विशाखा था।
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    Janmashtami: इस वन में आज भी श्रीकृष्ण रचाते हैं रासलीला, देखने वाले हो जाते हैं पागल

    जल न मिलने पर कन्हैया ने अपनी बांसुरी से इस कुंड़ की खुदाई की और उसमें से निकले जल से विशाखा ने अपनी प्यास बुझाई। इस प्रकार यह कुंड़ विशाखा कुंड के नाम से प्रसिद्ध हुआ।