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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
महाबलीपुरम का एक और मुख्य आकर्षण है- कृष्ण की मक्खन गेंद जिसे स्थानीय लोग ‘कृष्णा’ज बटर बॉल’ कहते हैं। यह पुराना गोल पत्थर है जिसका व्यास 5 मीटर और ऊंचाई 20 फुट है।
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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
इसे देखकर लगता है, यह किसी समय भी लुढ़क सकता है। 1908 में मद्रास के तत्कालीन गवर्नर आर्थर ने इसे हटवाने के लिए 7 हाथियों से खिंचवाया था
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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
परंतु यह टस से मस नहीं हुआ और गुरुत्व के सभी नियमों को ताक पर रख कर आज भी ढलान वाली चट्टान पर 45 डिग्री के कोण पर कायम है। तमिलनाडु में कई प्राचीन शहर हैं जिनमें से एक है महाबलीपुरम जो समुद्र तट पर स्थित है।
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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
यह दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित एक मंदिर कस्बा है। यहां अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, तट मंदिर और रथ गुफा मंदिर इनमें से सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं।
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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
इस शहर का इतिहास बहुत ही प्राचीन और भव्य है। इसका नाम महान दानवीर असुर राजा महाबली के नाम पर रखा गया था। 7वीं और 10वीं सदी के पल्लव राजाओं द्वारा बनाए गए कई मंदिर और स्थान यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं।
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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
यहां प्राचीनकाल में सैंकड़ों मंदिर थे। यह स्थान कई भव्य मंदिरों, स्थापत्य कला और सागर-तटों के लिए बहुत प्रसिद्ध था। महाबलीपुरम के बारे में माना जाता है कि इसके तट पर 17वीं शताब्दी में 7 मंदिर स्थापित किए गए थे और एक तटीय मंदिर को छोड़ कर शेष 6 मंदिर समुद्र में डूब गए थे।
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Mahabalipuram: आज भी अनसुलझे हैं इस अनोखे मंदिर के रहस्य
महाबलीपुरम में 8 रथ हैं जिनमें से पांच को महाभारत के पात्र पांच पाण्डवों और एक द्रौपदी का नाम दिया गया है। इनका निर्माण बौद्ध विहार शैली तथा चैत्यों के अनुसार किया गया है अपरिष्कृत तीन मंजिल वाले धर्मराज रथ का आकार सबसे बड़ा है।