साल के 365 दिनों में से 1 ही दिन खुलते हैं इस मंदिर के कपाट, मिलती है सर्प दोष से मुक्ति
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    साल के 365 दिनों में से 1 ही दिन खुलते हैं इस मंदिर के कपाट, मिलती है सर्प दोष से मुक्ति

    यूं तो देश के कई राज्यों में नाग देवता के मंदिर हैं पर उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर की बात कुछ अलग ही है। इसकी प्रसिद्ध का कारण है मंदिर का पूरे साल में केवल एक दिन खुलना।
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    साल के 365 दिनों में से 1 ही दिन खुलते हैं इस मंदिर के कपाट, मिलती है सर्प दोष से मुक्ति

    बता दें यह प्राचीन मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के प्रांगण में ही स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हर साल नाग पंचमी के दिन मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और विधि-वत नाग देवता की पूजा होती है।
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    मंदिर के पुजारियों के बताए अनुसार इस दौरान स्वयं नागराज तक्षक मंदिर में उपस्थित रहते हैं।
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    बता दें कि नागचन्द्रेश्वर मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में सबसे ऊपर यानि तीसरे खंड में स्थित है।
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    ग्यारहवीं शताब्दी के इस मंदिर में नाग पर आसीन शिव-पार्वती की अतिसुंदर प्रतिमा स्थापित है, जिसके ऊपर छत्र के रूप में नागदेवता अपना फन फैलाए हुए हैं। कहा जाता है यगह दुनिया का यह एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर देवों के देव शिव और पार्वती की ऐसी अद्भुत प्रतिमा स्थापित है।
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    यह मंदिर केरल के अलप्पुझा जिले के हरीपद गांव में घनें जंगल के बीच स्थित है। इस मंदिर की ओर बढ़ने पर रास्ते में पेड़ों पर 30000 से ज्यादा सापों की आकृति बनी हुई दिखाई देती है। यहां नागदेवता के साथ उनकी पत्नी नागयक्षी की प्रतिमा भी मौजूद है।
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    साल के 365 दिनों में से 1 ही दिन खुलते हैं इस मंदिर के कपाट, मिलती है सर्प दोष से मुक्ति

    उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में स्थित धौलीनाग मंदिर बहुत ही खास है। इस मंदिर में रोज नागदेवता की पूजा होती है। इसकी स्थापना विजयपुर के पास एक पहाड़ी की चोटी पर हुई थी।