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    कुंभ क्या है ?

    हिंदू धर्म में हर पर्व को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। ऐसा ही एक पर्व है कुंभ। कुंभ के बारे में कहा जाता है कि ये हिंदू धर्म का एक ऐसा धार्मिक आयोजन होता है जिसमें शिव शंकर के भक्तों का सबसे बड़ा जमावड़ा इकठ्ठा होता है।
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    कुंभ क्या है ?

    इस त्योहार के दौरान सैकड़ों की संख्या में लोग यहां मौजूद रहते हैं। बता दें कि कुंभ का अर्थ कलश से है यानि घड़ा। कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार कुंभ का संबंध समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश से जुड़ा हुआ है।
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    कुंभ क्या है ?

    इससे संबंधित ये कहा जाता है कि जब अमृत कलश को देवता-असुर एक दूसरे से छीन रहे थे तब इसकी कुछ बूंदें धरती की नदियों में गिर गई।इससे संबंधित ये कहा जाता है कि जब अमृत कलश को देवता-असुर एक दूसरे से छीन रहे थे तब इसकी कुछ बूंदें धरती की नदियों में गिर गई।
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    कुंभ क्या है ?

    बता दें कि गंगा नदी (प्रयाग, हरिद्वार), गोदावरी नदी (नासिक), क्षिप्रा नदी (उज्जैन) इन सभी नदियों का संबंध गंगा से है। गोदावरी को गोमती गंगा के नाम से पुकारते हैं।क्षिप्रा नदी को भी उत्तरी गंगा के नाम से जानते हैं, यहां गंगा गंगेश्वर की आराधना की जाती है।
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    कुंभ क्या है ?

    बहुत कम लोग जानते होंगे कि हिंदू धर्म का ये सबसे बड़ा त्योहार कहा जाने वाला कुंभ 12 वर्ष के अंतराल पर चारों में से किसी एक पवित्र नदी के तट पर मनाया जाता है।
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    कुंभ क्या है ?

    बता दें कि वो नदियां हैं हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में संगम जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं। इतना तो सब जानते हैं कि कुंभ मेले का आयोजन बहुत वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन इसके इतिहास के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
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    कुंभ क्या है ?

    तीन वर्ष में एक बार आता है कुंभ- कहा जाता है कि कुंभ का आयोजन चार स्थानों पर हर तीन वर्ष के अंतराल में होता है, इसीलिए किसी एक स्थान पर 12 वर्ष बाद ही कुंभ का आयोजन होता है।
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    कुंभ क्या है ?

    जैसे उज्जैन में कुंभ का अयोजन हो रहा है तो उसके बाद अब तीन वर्ष बाद हरिद्वार, फिर अगले तीन वर्ष बाद प्रयाग और फिर अगले तीन वर्ष बाद नासिक में कुंभ का आयोजन होगा।
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    कुंभ क्या है ?

    फिर से उज्जैन में कुंभ का आयोजन होगा। बता दें कि उज्जैन के कुंभ को सिंहस्थ कहा जाता है।